Saman nagrik sanhita के नुकसान और फायदे

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Saman nagrik sanhita 

मोदी सरकार समान नागरिक सहिंता लाना चाहती है लेकिन क्या हकीकत में सभी धर्मो को एक चश्मे से देखती भी है या नही ।


एक तरह जहाँ कावड़ यात्रा के लिए सड़को को खाली किया जा रहा है वहीं सिर्फ चंद मिनटों के लिए सड़क पर नमाज़ पढ़ने के लिए मुसलमानों पर fir भी हुई है । तो ये कहना बेमानी होगा कि समान नागरिग संहिता मुसलमान और हिंदुओ को एक समान नज़र से देखने के बारे मे है ।



bjp क्यों लाना चाहती है सामान नागरिक संहिता


राम मंदिर , धारा 376 और सामान नागरिक सहिंता तीन ऐसे मुद्दे है जिनका इस्तेमाल bjp ने हिन्दुओ का वोट पाने के लिए किया है । अब  क्योंकि राम मंदिर बन चुका है और धारा 376 भी लागू हो चुकी है इसलिए अब सिर्फ सामान नागरिक सहिंता ही ऐसा मुद्दा बचा है जिस पर बीजेपी धुर्वीकरण करके वोट पाना चाहती है । 


bjp सुरुवात से भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहती है और वह चाहती है कि भारत में रहने वाला हर नागरिक हिंदवादी तरीके से रहे । जहाँ भारत का सविंधान सभी धर्मों को मानने की आज़ादी देता है । और उन्हें उनके तरिके से मानने की आज़ादी देता है  वही समान नागरिक सहिंता के अनुसार सारे धर्मो के लिए एक कानून लागू होगा और वह कानून हिन्दू मान्यता के अनुसार होगा ।


समान नागरिक सहिंता धर्म परिवर्तन की सरकारी साजिश है जो कभी भी सफल नही होगी । इस कानून के मुसलमान जेल ज़रूर जाएंगे लेकिन वो अपनी मान्यताओं को छोड़ेंगे नही । और ना ही छोड़नी चाहिए । 


 bjp दुनिया को बता रही की  इस कानून के ज़रिए वो मुसलमानों का भला कर रही है लेकिन जो पार्टी साफ कहती है उसे मुसलमानों का वोट नही चाहिये ना ही वो मुसलमानों को इलेक्शन में टिकट देती है आखिर उस पर यकीन कैसे किया जा ।



saman nagarik sanhita के फायदे 


भारत में saman नागरिक संहिता कानून लाने के लिए भारत के मुसलमानों को सभी ये ज्ञान दे रहे है कि ये तो मुसलमानों की भलाई के लिए है । इससे बहु विवाह की प्रथा खत्म हो जायेगी । लोग चार शादियां नही कर पाएंगे लेकिन यूरोप के विकसित देशों में लोग अपनी ज़िंदगी मे आम तौर पर कई शादियां करते है और दुनियां उसे मॉर्डनाइजेशन कहती है जबकि वही काम मुसलमान के लिए रूढ़िवादी बन जाता है । 4 शादियां करना मुसलमान के लिए जरूरी नही है बस एक ऑप्शन है ।


भारत के मुसलमानों को समान नागरिक सहिंता के नाम पर लॉलीपॉप दिया जा रहा है जिसने वो दुविधा में फंस जाएंगे कि अपने धर्म को माने या फिर देश के सविंधान को । 





मोदी सरकार में मुसलमानों को जितना सताया या दबाया गया है उतना शायद ही पहले किसी दौर में दबाया गया हो । इसी क्रम में एक और कोशिश है समान नागरिक सहिंता ।

समान नागरिक सहिंता के ज़रिए bjp सीधे सीधे मुस्लिम धर्म की मान्यताओं को निशाना बना रही है ।  ऐसा माना जा रहा है कि  bjp एक साजिस की तरह मुसलमानों के लिए ही ucc को लाना चाहती है ताकि मुस्लिम पर्सनल low को खत्म किया जा सके 



क्या बदलाव आएगा saman nagrik sanhita से 



भारत में अभी शादी, तलाक़, उत्तराधिकार और गोद लेने के मामलों में अलग अलग धर्मों में उनके धर्म, आस्था और विश्वास के आधार पर अलग-अलग क़ानून हैं.। भारत के मुसलमानों की इन समस्याओं पर सुनवाई मुस्लिम पर्सनल लौ के तहत की जाती है । अगर समान नागरिक संहिता का कानून बन जायेगा  तो मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसी संस्थाएं खत्म हो जाएंगी।


 इस्लाम के अनुसार किसी भी मुस्लिम मर्द  को 4 शादी तक करने की इजाजत है और अगर ucc का कानून बनता है तो दूसरी शादी करना भी कानून जुर्म हो जाएगा ।



वंही एक मुसलमान को अपनी शादी तोड़ने के लिए मौखिक रूप से तलाक कहना होता है

यूसीसी लागू होने पर मुसलमानों को भी हिंदू समुदाय की तरह शादी तोड़नी के लिये  कोर्ट जाना पड़ेगा। 

इसी तरह से 

अभी संपत्ति की हिफाजत के लिए अगर कोई मुस्लिम दंपति बच्चा गोद लेता है तो मुस्लिम लॉ के तहत वह पूरी संपत्ति उसके नाम नहीं कर सकता है लेकिन  समान नागरिक सहिंता लागू हो जाने पर वही बच्चा गोद लेने वाले कि जायेजात में  मालिकाना हक का दावेदार बन जायेगा ।


इसी से समझा जा सकता है कि  समान नागरिक संहिता के द्वारा बीजेपी हिंदू धर्म की मान्यताओं को मुसलमानों पर थोपना चाहती है ।



समान नागरिक सहिंता कानून का देश के मुसलमान बेशब्री से इंतजार कर रहे है क्योंकि इसके आ जाने के बाद से मुसलमानों को भी देश मे हिंदुओ के समान मान लिया जाएगा और भारत के pm मोदी जी उन्हें कपड़ो से पहचान नही पाएंगे । गुजरात दंगों के पीड़ितों को इंसाफ मिल जाएगा और रोजाना मुसलमानों के खिलाफ हो रही मोब linchyng बंद हो जाएगी ।


2014 से 2023 तक का दौर किसी भी मुसलमान के लिए बेहद तकलीफ भरा गुजरा है । मोदी सरकार ने हर तरह से मुसलमानों को हाशिये पर धकेलने की कोशिश की  और काफी हद तक कामयाब भी रही । एक तरफ तो मोदी सरकार सबका साथ और सबका विश्वास जैसा नारा देती रही वहीं दूसरी और मुसलमानों का राजनीतिक कैरियर खत्म करने की हर कोशिश करती रही । bjp ने ना सिर्फ मुसलमानों को इलेक्शन में टिकट देने से इनकार किया बल्कि जो लोग पहले से ही मुसलमानो के नेता माने जाते थे उनके ऊपर लगातार मुकदमें दर्ज कर उन्हें जेलों में बंद कर दिया । जिससे मुसलमानों के पास राजनीति करने का मौका ही नही बचा ।



मोदी सरकार के दौर में मुसलमानों के लिए nrc लाया गया ताकि मुसलमानों से उनका घर उनका वतन छीना जा सके । उसके बाद तीन तलाक़ और अब समान नागरिग सहिंता ।



हमारे सविंधान ने हमे कई तरह के अधिकार दिए है और उनमें से एक है अपने धर्म को अपने तरीके से मानने का अधिकार । अगर सभी धर्म एक ही तरीके से रहने लगे तो विविधता में एकता कहाँ रह पाएगी ।

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