Kin se nikah haram hai | kis aurat se shadi nahi karni chahiye

Nikah karne ka tarika | kin se nikah haram hai | kis aurat se nikah haram hai 



Nikah ka matlab 

 Nikah एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ होता है मिलना या करीब आना और इसका शाब्दिक अर्थ है मर्द का एक औरत के साथ एक रिश्ते में शामिल होना जिसके लिए अल्लाह ने हमे बनाया है । 


Nikah मर्द और औरत के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट है जो मर्द और उस औरत के यौन संबंधों को जायज़ बनाता है । क्योंकि निकाह है कॉन्ट्रैक्ट है इसलिए मर्द और औरत कभी भी निकाह को आपसी सहमति से तोड़ सकते । अगर मर्द इस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ना चाहता है तो वह तलाक़ दे सकता है और अगर औरत निकाह को तोड़ना चाहती है तो वह खुला ले सकती है ।


Nikah ka maqsad


Nikah सिर्फ शब्दों से बंध जाता है जैसे कि किसी ने गवाहों के सामने कह दिया कि मैंने अपनी लड़की का निकाह तुम्हारे साथ किया और उसने कहा कि मैंने कबूल किया । हां अगर उस शक्स की कई लड़कियां है तो नाम लेकर कहना होगा कि मैंने अपनी फलां लड़की का निकाह तुम्हारे साथ किया और उस लड़के को भी कहना होगा कि हां मैन कबूल किया ।


Nikah karne ka tarika | nikah karne ka sunnat tarika

अगर खुद औरत nikah की जगह मौजूद है तो औरत से इशारा करके कहें कि मैंने इसके साथ निकाह किया और वह कह दे कि मैंने निकाह कबूल किया । 


Nikah के लिए ज़रूरी है कि कम से कम दो मर्द या एक मर्द और दो औरतों के सामने निकाह किया जाए । और गवाह अपने कानों से दोनों की बातों को सुने ।  अकेले में एक ने कहा की मैंने अपनी लड़की का nikah किया और दूसरे ने कबूल किया तो  nikah नही माना जायेगा । 

अगर गवाह के तौर पर सिर्फ दो औरतें है और मर्द कोई भी नही तब निकाह जायज़ नही है गवाही में अगर 10 से 12 औरते है तब भी निकाह  नही होगा । दो औरतों के साथ एक मर्द का होना ज़रूरी है । 


गवाह अगर दो मर्द है लेकिन मुसलमान नही तब भी निकाह नही होगा । अगर गवाह दोनों मुसलमान है लेकिन उनमें से एक जवान नही तब भी निकाह नही होगा । अगर एक मर्द और दो औरते है लेकिन उनमें से एक औरत जवान नही है तब भी निकाह नही सही नही हुआ ।


kin se nikah haram hai | kis aurat se nikah haram hai 



अपने दामाद के साथ भी निकाह हराम है चाहे लड़की की रुखसती हुई हो या नही हुई हो , दोनों सूरतों में ही निकाह हराम है ।


सौतेली औलाद से भी निकाह सही नही है । उदहारण के तौर पर एक मर्द की कई बीवियां है तब उनकी संतान से निकाह हराम है चाहे वो अपने मियां के साथ रह चुकी हो या ना रह चुकी हो , दोनों ही सूरत में निकाह हराम है ।


ससुर और ससुर के बाप दादा के साथ भी निकाह दुरुस्त नही है ।


जब तक अपनी बहन निकाह में है तब तक निकाह बहनोई से दुरुस्त नही है । 


अगर बहन मर गयी है या उसने छोड़ दिया तब इद्दत पूरी होने पर निकाह जायज़ है । इद्दत पूरी होने से पहले भी निकाह हराम है ।


अगर दोनों बहनों ने एक ही मर्द से निकाह किया है तो जिसने पहले निकाह किया वह सही है और जिसने बाद में किया वह सही नही है ।


एक औरत से एक मर्द का निकाह हुआ अब वह औरत जब तक निकाह में है तब तक उसकी फूफी , खाला , भांजी , और भतीजी के साथ निकाह नही हो सकता । 


जिन दो औरतों में ऐसा रिश्ता हो कि इनमें से कोई एक मर्द हो तो आपस मे निक़ाह न हो सकेगा । ऐसी दों औरतें की एक साथ एक मर्द  के निक़ाह में ना रह सकेंगी । जब एक मार जाए या तलाक़ ले ले तब इद्दत गुजर जाने के बाद दूसरी औरत निक़ाह कर सकती है ।


एक औरत है और एक उसकी सौतेली लड़की है अगर वो दोनों एक मर्द से निकाह करें तो दुरुस्त है ।


ले पालक का शरई में कुछ ऐतबार नही है ऐसे में लड़का बनाने से वह सचमुच लड़का नही बन जाता इसलिए ले पालक से निकाह कर लेना दुरुस्त है  ( ले पालक किसी दूसरे का वह लड़का होता है जिसे आप बेटा समझ कर पालते है । यानी कि गोद लिया हुआ बेटा  )


अगर सगा मामा नही है बल्कि रिश्ते में मामा है तो निक़ाह जायज़ है इसी तरह से दूर के रिश्ते में चाचा , भाई , भतीजा , भांजा ,आदि से भी निक़ाह जायज़ है । ऐसे में अगर चचाज़ाद भाई है , मामू ज़ाद भाई , खाला ज़ाद भाई आदि से भी निक़ाह जायज़ है । 


इसी तरह से अगर दो बहन जो सगी नही है बल्कि मामा ज़ाद , फूफी ज़ाद या फिर खाला ज़ाद बहने है तो एक ही मर्द से एक साथ निक़ाह कर सकती है । ये ही मसला फूफी और खाला का है अगर दूर का रिश्ता निकलता है तो फूफी भतीजी और खाला भांजी एक साथ एक ही मर्द के साथ निकाह कर सकती है ।


जितने रिश्ते नसब के एतबार से हराम है वो रिश्ते दूध पीने के एतबार से भी हराम है यानी दूध पिलाने वाली के शौहर से निकाह हराम है क्योंकि वह उसका बाप हुआ । दूध शरीक भाई से भी निक़ाह दुरुस्त नही है जिसको उसने दूध पिलाया है उससे और उसकी औलाद से निक़ाह दुरुस्त नही क्योंकि वह उसकी औलाद हुई । दूध के हिसाब से मामू , चाचा , भांजा , भतीजा सबसे निक़ाह हराम है । 


दूध शरीक दो बहनें एक साथ एक मर्द के निक़ाह में नही रह सकती क्योंकि दूध के रिश्तों में ये ही हुक्म है ।


किसी मर्द ने एक औरत से निकाह किया अब उस मर्द की माँ और उसकी औलाद से निकाह दुरुस्त नही है ।


किसी औरत ने जवानी की ख्वाहिश के लिए किसी मर्द को हाथ लगाया तो अब उस मर्द के लिए उस औरत के मां और औलाद से निकाह दुरुस्त नही है । उसी तरह से किसी मर्द ने किसी औरत को हाथ लगाया है तब वह मर्द उस औरत की मां और औलाद पर हराम हो गया । 


अगर रात को एक मर्द बीवी को जगाने के लिए उठा और गलती से लडक़ी या फिर सास पर हाथ लग गया और ज़वानी की ख्वाहिश पूरी करने के लिए हाथ लगाया तो उस मर्द के लिए उसकी औरत उस पर हराम हो गयी । अब कोई शक्ल जायज़ होने की नही है और बेहतर ये है कि वह मर्द अपनी बीवी को तलाक दे दे ।


किसी लड़के ने अपनी सौतेली माँ पर बदनीयती से हाथ डाल दिया अब वह औरत अपने मर्द पर हमेशा के लिए हराम हो गयी और कोई भी सूरत जायज़ होने की नही है । अगर उस सौतेली मां ने सौतेले लड़के के साथ ऐसा किया है तब भी ये हुक्म है । 


मुसलमान और का निकाह मुसलमान के अलावा किसी और मज़हब के मर्द से जायज़ नही । 


किसी औरत को उसके पति ने तलाक दे दी या वह मर गया इस सूरत में जब तक तलाक़ की इद्दत या मरने की इद्दत पूरी ना हो जाये तब तक उस औरत का निकाह करना दुरुस्त नही है ।


जिस औरत का निकाह किसी मर्द के साथ हो चुका है अब उस औरत का बिना तलाक़ लिए या इद्दत पूरी किये बगैर निक़ाह करना दुरुस्त नही है । 


जिस औरत का शौहर हो उसको बदकारी से हमल हो तो उसका निक़ाह दुरुस्त है हां जब तक कि बच्चा पैदा ना हो जाये तब तक शोहबत करना सही नही है । अगर जिससे जीना किया है उसी से निकाह हो जाये तब शोहबत भी सही है । 


जिस मर्द के निक़ाह में चार औरतें है अब उस मर्द से पाँचवी औरत का निकाह दुरुस्त नही है । अगर उन चार में से उसने एक औरत को तलाक दे दी हो तब जब तक कि तलाक़ की इद्दत पूरी ना हो जाये तब तक उस मर्द से कोई और औरत निक़ाह नही कर सकती । 


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